गर हो फलक बेदाद तो नियाज़-ओ-दुआ क्यों हो
उनसुनी रहे फरियाद तो इजलास-ए-खुदा क्यों हो
परे है अक़्ल से मेरे दिल-ए-हरिस की बेसब्री
जो हो फ़ना बार बार उसे आरज़ू-ए-कज़ा क्यों हो
वो देखें कभी मुझे कभी देखें मेरे हालात को
ना रखा इक इतेफ़ाक़ तो मेरा मुआयना क्यों हो
बे-ताल्लुक़ तो नहीं है हयात-ओ-रंज-ओ-गम
रुके जो आब-ए-दीदा तो खून-ए-रवा क्यों हो
क्यों ना उठे सैलाब-ए-गम बहा ले जाए मुझे
इरतहाल-ए-मायूस हो तो कतरा कतरा क्यों हो
उनसुनी रहे फरियाद तो इजलास-ए-खुदा क्यों हो
परे है अक़्ल से मेरे दिल-ए-हरिस की बेसब्री
जो हो फ़ना बार बार उसे आरज़ू-ए-कज़ा क्यों हो
वो देखें कभी मुझे कभी देखें मेरे हालात को
ना रखा इक इतेफ़ाक़ तो मेरा मुआयना क्यों हो
बे-ताल्लुक़ तो नहीं है हयात-ओ-रंज-ओ-गम
रुके जो आब-ए-दीदा तो खून-ए-रवा क्यों हो
क्यों ना उठे सैलाब-ए-गम बहा ले जाए मुझे
इरतहाल-ए-मायूस हो तो कतरा कतरा क्यों हो
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