Monday, 30 August 2010

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

हर बात गवारा कर लोगे मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीज़ें भी बंधवाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

तन्हाई के झूले खूलेंगे हर बात पुरानी भूलेंगे
आईने से तुम घबराओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

जब सूरज भी खो जायेगा और चाँद कहीं सो जायेगा
तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

बेचैनी बढ़ जायेगी और याद किसी की आएगी
तुम मेरी गज़लें गाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा